August 20, 2026

Pitru Paksha 2026: 26 सितंबर से श्राद्ध तिथि सूची, तर्पण विधि और सर्वपितृ अमावस्या

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Pitru Paksha 2026 में पूर्णिमा श्राद्ध 26 सितंबर से शुरू होगा और सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर को होगी। जानें श्राद्ध की पूरी तिथि सूची, किस दिन कौन सा श्राद्ध करें और तर्पण की सामान्य विधि।

Pitru Paksha 2026 श्राद्ध तिथि और तर्पण करते हुए व्यक्ति

Pitru Paksha 2026 में पूर्वजों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान का विशेष महत्व माना जाता है।

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Pitru Paksha 2026: 26 सितंबर से श्राद्ध तिथि सूची, तर्पण विधि और सर्वपितृ अमावस्या

पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करने के लिए हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व माना जाता है। इस दौरान परिवार के दिवंगत सदस्यों की तिथि के अनुसार श्राद्ध, तर्पण और अन्य पारंपरिक कर्म किए जाते हैं।

Pitru Paksha 2026 में पूर्णिमा श्राद्ध 26 सितंबर 2026 को होगा। इसके बाद 27 सितंबर से प्रतिपदा श्राद्ध शुरू होगा और 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या के साथ पितृ पक्ष का समापन होगा।

इस दौरान अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध करने की परंपरा है। अगर किसी पूर्वज की मृत्यु तिथि ज्ञात न हो, तो सर्वपितृ अमावस्या को श्राद्ध करने की परंपरा है।

Pitru Paksha 2026: मुख्य तिथियां

अवसरतारीखदिन
पूर्णिमा श्राद्ध26 सितंबर 2026शनिवार
प्रतिपदा श्राद्ध27 सितंबर 2026रविवार
द्वितीया श्राद्ध28 सितंबर 2026सोमवार
तृतीया श्राद्ध29 सितंबर 2026मंगलवार
महाभरणी29 सितंबर 2026मंगलवार
चतुर्थी श्राद्ध30 सितंबर 2026बुधवार
पंचमी श्राद्ध30 सितंबर 2026बुधवार
षष्ठी श्राद्ध1 अक्टूबर 2026गुरुवार
सप्तमी श्राद्ध2 अक्टूबर 2026शुक्रवार
अष्टमी श्राद्ध3 अक्टूबर 2026शनिवार
नवमी श्राद्ध / मातृ नवमी4 अक्टूबर 2026रविवार
दशमी श्राद्ध5 अक्टूबर 2026सोमवार
एकादशी श्राद्ध6 अक्टूबर 2026मंगलवार
द्वादशी श्राद्ध7 अक्टूबर 2026बुधवार
त्रयोदशी श्राद्ध8 अक्टूबर 2026गुरुवार
चतुर्दशी श्राद्ध9 अक्टूबर 2026शुक्रवार
सर्वपितृ अमावस्या10 अक्टूबर 2026शनिवार

पितृ पक्ष 2026 कब से शुरू होगा?

2026 में 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध होगा। इसके अगले दिन यानी 27 सितंबर को प्रतिपदा श्राद्ध से पितृ पक्ष की नियमित श्राद्ध तिथियों का क्रम शुरू होगा।

10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ यह अवधि समाप्त होगी।

इसलिए अगर आप “Pitru Paksha 2026 कब है?” खोज रहे हैं, तो 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध और 27 सितंबर से नियमित पितृ पक्ष श्राद्ध की तिथियों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

पूर्णिमा श्राद्ध कब है?

पूर्णिमा श्राद्ध 26 सितंबर 2026, शनिवार को है।

यह उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण श्राद्ध तिथि है जिनका निधन पूर्णिमा तिथि को हुआ था। हालांकि अलग-अलग पंचांग परंपराओं में श्राद्ध के नियमों में अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग और परिवार की परंपरा को ध्यान में रखना उचित है।

पितृ पक्ष की पूरी श्राद्ध तिथि सूची

26 सितंबर — पूर्णिमा श्राद्ध

26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध किया जाएगा। यह पितृ पक्ष की मुख्य श्राद्ध अवधि से पहले आने वाली पूर्णिमा श्राद्ध तिथि है।

27 सितंबर — प्रतिपदा श्राद्ध

27 सितंबर को प्रतिपदा श्राद्ध होगा। जिन पूर्वजों का निधन प्रतिपदा तिथि को हुआ था, उनके लिए इस दिन श्राद्ध करने की परंपरा है।

28 सितंबर — द्वितीया श्राद्ध

28 सितंबर को द्वितीया श्राद्ध होगा। यह द्वितीया तिथि पर दिवंगत हुए पूर्वजों के लिए निर्धारित श्राद्ध तिथि है।

29 सितंबर — तृतीया श्राद्ध और महाभरणी

29 सितंबर को तृतीया श्राद्ध के साथ महाभरणी का भी विशेष उल्लेख मिलता है। इस दिन भरणी नक्षत्र से जुड़ा श्राद्ध भी किया जाता है।

30 सितंबर — चतुर्थी और पंचमी श्राद्ध

30 सितंबर को चतुर्थी और पंचमी दोनों श्राद्ध तिथियां आती हैं। इसलिए इस दिन दोनों तिथियों के अनुसार श्राद्ध करने वाले परिवारों के लिए विशेष महत्व रहता है।

1 अक्टूबर — षष्ठी श्राद्ध

1 अक्टूबर को षष्ठी श्राद्ध होगा।

2 अक्टूबर — सप्तमी श्राद्ध

2 अक्टूबर को सप्तमी श्राद्ध होगा।

3 अक्टूबर — अष्टमी श्राद्ध

3 अक्टूबर को अष्टमी श्राद्ध होगा।

4 अक्टूबर — नवमी श्राद्ध और मातृ नवमी

4 अक्टूबर को नवमी श्राद्ध होगा। इसी दिन मातृ नवमी भी मानी जाती है।

मातृ नवमी को विशेष रूप से माता और परिवार की दिवंगत महिला सदस्यों के श्राद्ध से जोड़ा जाता है। परिवार की परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार इस दिन की विधि तय की जाती है।

5 अक्टूबर — दशमी श्राद्ध

5 अक्टूबर को दशमी श्राद्ध होगा।

6 अक्टूबर — एकादशी श्राद्ध

6 अक्टूबर को एकादशी श्राद्ध होगा।

7 अक्टूबर — द्वादशी श्राद्ध

7 अक्टूबर को द्वादशी श्राद्ध होगा। इस दिन मघा श्राद्ध का भी उल्लेख पंचांग में मिलता है।

8 अक्टूबर — त्रयोदशी श्राद्ध

8 अक्टूबर को त्रयोदशी श्राद्ध होगा।

9 अक्टूबर — चतुर्दशी श्राद्ध

9 अक्टूबर को चतुर्दशी श्राद्ध होगा। अकाल मृत्यु या विशेष परिस्थितियों में दिवंगत लोगों के लिए इस तिथि का विशेष महत्व माना जाता है।

10 अक्टूबर — सर्वपितृ अमावस्या

10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या होगी। इसे महालय अमावस्या भी कहा जाता है।

यह पितृ पक्ष की अंतिम और महत्वपूर्ण तिथि है। जिन पूर्वजों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं हो या जिनका नियमित तिथि पर श्राद्ध नहीं हो पाया हो, उनके लिए इस दिन श्राद्ध करने की परंपरा है।

किस तिथि पर किस पूर्वज का श्राद्ध करें?

सामान्य परंपरा के अनुसार जिस तिथि को परिवार के किसी सदस्य का निधन हुआ था, पितृ पक्ष में उसी तिथि पर उनका श्राद्ध किया जाता है।

उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति का निधन भाद्रपद या आश्विन कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को हुआ था, तो पितृ पक्ष की द्वितीया तिथि पर उनका श्राद्ध किया जाता है।

मृत्यु तिथि की जानकारी न होने की स्थिति में सर्वपितृ अमावस्या महत्वपूर्ण मानी जाती है।

हालांकि श्राद्ध तिथि की गणना स्थानीय पंचांग, स्थान और पारिवारिक परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए विशेष स्थिति में स्थानीय पंडित या विद्वान से तिथि की पुष्टि करना बेहतर है।

सर्वपितृ अमावस्या का महत्व

सर्वपितृ अमावस्या पितृ पक्ष की अंतिम तिथि होती है। इस दिन उन पूर्वजों के लिए भी श्राद्ध और तर्पण किया जाता है जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है या जिनका श्राद्ध निर्धारित तिथि पर नहीं किया जा सका।

इसी कारण इसे पितृ पक्ष की सबसे महत्वपूर्ण तिथियों में से एक माना जाता है।

मातृ नवमी का क्या महत्व है?

मातृ नवमी 4 अक्टूबर 2026 को होगी।

हिंदू परंपरा में इस दिन विशेष रूप से माता के श्राद्ध का महत्व बताया जाता है। कई परिवार इस दिन अपनी दिवंगत माता, दादी, नानी या अन्य महिला पूर्वजों का स्मरण करते हुए श्राद्ध और तर्पण करते हैं।

अगर परिवार में किसी महिला पूर्वज के श्राद्ध को लेकर विशेष परंपरा है, तो उसी के अनुसार कर्म करना उचित माना जाता है।

पितृ पक्ष में तर्पण कैसे किया जाता है?

तर्पण पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने की पारंपरिक विधि है। इसकी विधि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों की परंपराओं के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है।

सामान्य रूप से:

  1. सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  2. पूजा या तर्पण के लिए स्वच्छ स्थान तैयार करें।
  3. अपने परिवार की परंपरा के अनुसार तर्पण का संकल्प लें।
  4. जल में काले तिल का उपयोग किया जा सकता है।
  5. कुश और जल का प्रयोग परंपरा के अनुसार किया जाता है।
  6. पूर्वजों का स्मरण करते हुए जल अर्पित करें।
  7. श्राद्ध कर्म के बाद भोजन और दान अपनी परंपरा के अनुसार करें।

तर्पण की सही दिशा, मंत्र और विधि क्षेत्रीय तथा पारिवारिक परंपराओं के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए यदि आप पहली बार श्राद्ध कर रहे हैं, तो किसी योग्य आचार्य या परिवार के जानकार व्यक्ति से विधि समझ लेना बेहतर है।

श्राद्ध में किन चीजों का उपयोग किया जाता है?

पारंपरिक श्राद्ध कर्म में परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार अलग-अलग सामग्री का उपयोग किया जाता है।

आम तौर पर इनमें शामिल हो सकते हैं:

  • जल
  • काले तिल
  • कुश
  • जौ
  • चावल
  • पिंड के लिए निर्धारित सामग्री
  • सात्विक भोजन
  • फल
  • पुष्प
  • दान की सामग्री

हर परिवार में सभी सामग्री का इस्तेमाल एक जैसा नहीं होता। इसलिए स्थानीय परंपरा के अनुसार सामग्री तैयार करना उचित है।

श्राद्ध के दौरान भोजन और दान की परंपरा

श्राद्ध के अवसर पर सात्विक भोजन तैयार करने और जरूरतमंदों या ब्राह्मणों को भोजन कराने की परंपरा कई परिवारों में है।

कुछ परिवार गाय, कौवे और कुत्ते के लिए भी भोजन का हिस्सा निकालते हैं। ये परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अलग रूप में निभाई जाती हैं।

मुख्य उद्देश्य पूर्वजों का स्मरण, श्रद्धा और दान-पुण्य माना जाता है।

पितृ पक्ष में क्या नहीं करना चाहिए?

पितृ पक्ष के दौरान कई परिवार कुछ विशेष नियमों का पालन करते हैं।

इनमें सामान्य रूप से:

  • मांसाहार और मदिरा से बचना
  • सात्विक भोजन करना
  • अनावश्यक विवाद से बचना
  • पूर्वजों का श्रद्धापूर्वक स्मरण करना
  • दिखावे के बजाय श्रद्धा से कर्म करना
  • परिवार की परंपराओं का पालन करना

शामिल हो सकते हैं।

नए कार्यों या शुभ समारोहों को लेकर भी अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में अलग मान्यताएं हैं। इसलिए इसे सार्वभौमिक धार्मिक नियम मानने के बजाय अपनी परंपरा और स्थानीय मान्यता के अनुसार निर्णय लेना चाहिए।

क्या पितृ पक्ष में शादी या नया काम कर सकते हैं?

धार्मिक परंपराओं में पितृ पक्ष को मुख्य रूप से पूर्वजों के स्मरण और श्राद्ध के लिए समर्पित अवधि माना जाता है। इसलिए कई परिवार इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश और अन्य बड़े शुभ समारोहों को टालते हैं।

हालांकि हर धार्मिक परिवार और क्षेत्र में मान्यताएं समान नहीं हैं। किसी जरूरी काम के लिए परिवार की परंपरा और स्थानीय धार्मिक सलाह को ध्यान में रखना चाहिए।

अगर मृत्यु तिथि याद न हो तो क्या करें?

अगर किसी पूर्वज की मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं है, तो सर्वपितृ अमावस्या को उनका श्राद्ध करने की परंपरा है।

2026 में सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर को होगी।

यह उन परिवारों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण दिन है जिन्हें अपने किसी पूर्वज की मृत्यु तिथि की सही जानकारी नहीं है।

अगर श्राद्ध की तिथि छूट जाए तो क्या करें?

अगर किसी कारण से निर्धारित तिथि पर श्राद्ध नहीं हो पाया, तो तुरंत कोई मनमाना दिन चुनने के बजाय परिवार की परंपरा और स्थानीय पंडित से सलाह लेना बेहतर है।

कई धार्मिक परंपराओं में सर्वपितृ अमावस्या को छूटे हुए या अज्ञात तिथि वाले पूर्वजों के श्राद्ध के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

क्या पितृ पक्ष सिर्फ 15 दिन का होता है?

पितृ पक्ष को सामान्य रूप से 15 तिथियों की अवधि माना जाता है। 2026 में 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध अलग से आता है, जबकि प्रतिपदा से अमावस्या तक मुख्य श्राद्ध तिथियां 27 सितंबर से 10 अक्टूबर के बीच हैं।

कैलेंडर में कुछ श्राद्ध तिथियां एक ही Gregorian date पर पड़ती हैं, जैसे 30 सितंबर को चतुर्थी और पंचमी। इसलिए “15 तिथियां” और “कैलेंडर के दिनों” को एक ही चीज नहीं समझना चाहिए।

Pitru Paksha 2026 में ध्यान रखने वाली जरूरी बातें

बातजानकारी
पूर्णिमा श्राद्ध26 सितंबर 2026
नियमित श्राद्ध क्रम27 सितंबर से
मातृ नवमी4 अक्टूबर 2026
चतुर्दशी श्राद्ध9 अक्टूबर 2026
सर्वपितृ अमावस्या10 अक्टूबर 2026
मृत्यु तिथि ज्ञात होउसी तिथि पर श्राद्ध की परंपरा
मृत्यु तिथि ज्ञात न होसर्वपितृ अमावस्या महत्वपूर्ण
तर्पण सामग्रीजल, तिल, कुश आदि परंपरा अनुसार

Pitru Paksha 2026 FAQs

Pitru Paksha 2026 कब शुरू होगा?

26 सितंबर 2026 को पूर्णिमा श्राद्ध होगा। नियमित पितृ पक्ष श्राद्ध की शुरुआत 27 सितंबर को प्रतिपदा से होगी।

सर्वपितृ अमावस्या 2026 कब है?

सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर 2026, शनिवार को होगी।

मातृ नवमी 2026 कब है?

मातृ नवमी 4 अक्टूबर 2026, रविवार को होगी।

अगर पूर्वज की मृत्यु तिथि याद नहीं है तो श्राद्ध कब करें?

ऐसी स्थिति में 10 अक्टूबर 2026 की सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध करने की परंपरा है।

क्या पितृ पक्ष में रोज तर्पण करना जरूरी है?

यह परिवार की परंपरा और धार्मिक विधि पर निर्भर करता है। श्राद्ध की तिथि के अनुसार कर्मकांड करने वाले परिवारों में अलग-अलग नियम हो सकते हैं।

श्राद्ध किस दिशा में मुंह करके किया जाता है?

श्राद्ध और तर्पण की दिशा के संबंध में धार्मिक परंपराओं में विशेष नियम बताए जाते हैं। अलग-अलग विधियों में अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय आचार्य से सही विधि की पुष्टि करना बेहतर है।

क्या पितृ पक्ष में मांस और शराब से बचना चाहिए?

कई परिवार पितृ पक्ष के दौरान सात्विक भोजन करते हैं और मांस-मदिरा से दूर रहते हैं। यह धार्मिक और पारिवारिक परंपरा का विषय है।

क्या पितृ पक्ष में नया घर खरीद सकते हैं?

कई हिंदू परिवार पितृ पक्ष के दौरान गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्यों को टालते हैं। हालांकि व्यक्तिगत परिस्थितियों और स्थानीय परंपरा के अनुसार निर्णय अलग हो सकता है।

क्या सर्वपितृ अमावस्या सभी पूर्वजों के लिए होती है?

धार्मिक परंपरा में सर्वपितृ अमावस्या को विशेष रूप से उन पूर्वजों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है या जिनका नियमित तिथि पर श्राद्ध नहीं किया जा सका।

क्या पिंडदान और तर्पण एक ही चीज हैं?

नहीं। दोनों अलग-अलग धार्मिक कर्म हैं। तर्पण में जल आदि अर्पित करने की परंपरा है, जबकि पिंडदान में पिंड अर्पित किए जाते हैं। इनके नियम और विधि परंपरा के अनुसार अलग हो सकते हैं।

Pitru Paksha 2026 में श्राद्ध की सही तिथि कैसे पता करें?

पूर्वज की मृत्यु की हिंदू तिथि, स्थानीय पंचांग और परिवार की परंपरा को ध्यान में रखकर तिथि तय की जाती है। किसी विशेष मामले में स्थानीय पंचांग या योग्य आचार्य से पुष्टि करना बेहतर है।

निष्कर्ष

Pitru Paksha 2026 पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद करने और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने का महत्वपूर्ण समय है। 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध होगा, जबकि 27 सितंबर से प्रतिपदा के साथ नियमित श्राद्ध तिथियों का क्रम शुरू होगा और 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ इसका समापन होगा।

अपने पूर्वज की मृत्यु तिथि ज्ञात होने पर सामान्य परंपरा के अनुसार उसी तिथि पर श्राद्ध किया जाता है। वहीं मृत्यु तिथि ज्ञात न होने की स्थिति में सर्वपितृ अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है।

श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान की विधि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अलग हो सकती है। इसलिए किसी विशेष कर्मकांड के लिए अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार विधि अपनाना सबसे उचित रहेगा।

यह जानकारी धार्मिक और सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से है। श्राद्ध की सटीक तिथि, मुहूर्त और विधि के लिए अपने स्थान के पंचांग तथा योग्य आचार्य से पुष्टि करें।

ऐसी ही धार्मिक, Astrology और त्योहारों से जुड़ी जानकारी के लिए Manthan के साथ बने रहें।

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